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प्रभाकरन ने उन्हीं को मरवा डाला जिन्होंने उन्हें बुलेटप्रूफ़ जैकेट दी

जिस शख़्स को एक राष्ट्राध्यक्ष और एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या, श्रीलंका के एक और राष्ट्रपति की हत्या का प्रयास, सैकड़ों राजनीतिक हत्याओं, पच्चीसियों आत्मघाती हमलों, हज़ारों लोगों और सैनिकों की मौत का ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है, उसके लिए एक बात तो आँख मूंद कर कही जा सकती है कि वो निहायत ही ख़तरनाक व्यक्ति था जिसमें जीवट की कमी नहीं थी.

ओसामा बिन लादेन के आदेश पर न्यूयॉर्क का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर गिराए जाने से पहले प्रभाकरन के लोगों ने कोलंबो के भीड़ भरे इलाक़े में इसी नाम की उतनी ही प्रतीकात्मक इमारत नेस्तनाबूद की थी.

लेकिन ओसामा की तरह प्रभाकरन एक अमीर माँ बाप की संतान नहीं थे और न ही उन्होंने इस तरह के दुस्साहसी कामों को अंजाम देने के लिए किसी दूसरे देश की शरण ली थी. न ही ऐसे काम करने के लिए उन्हें किसी धर्म से प्रेरणा मिली थी. उनका एकमात्र धर्म था तमिल राष्ट्रवाद.

एक दशक के भीतर उन्होंने एलटीटीई को मामूली हथियारों के 50 से कम लोगों के समूह से 10 हज़ार लोगों के प्रशिक्षित संगठन में तब्दील कर दिया था जो एक देश की सेना तक से टक्कर ले सकता था.

साल 1972 में जब वो एक पेड़ के नीचे कुछ लोगों को बम बनाते देख रहे थे तो एक बम में विस्फोट हो गया था और प्रभाकरन बाल-बाल बचे थे.

इस दुर्घटना में उनका दांया पैर जलकर काला पड़ गया था. तभी से उनका नाम 'करिकलन' पड़ गया था जिसका अर्थ होता है काले पैर वाला शख़्स.

चॉकलेट और केकड़ों को उबाल कर खाने के शौक़ीन प्रभाकरन ने अपने अनुयायियों के सिगरेट और शराब पीने और यौन संबंध स्थापित करने पर पाबंदी लगा दी थी.

उनके निज़ाम में एलटीटीई सैनिकों को प्रेम संबंध बनाने की मनाही थी. ग़द्दारी की सिर्फ़ एक ही सज़ा थी, मौत.

उन्होंने अपने दो पुरुष और महिला अंगरक्षकों को सिर्फ़ इसलिए मौत के घाट उतारने का आदेश दिया था क्योंकि उन्होंने संबंध बनाने की जुर्रत की थी.

दिलचस्प बात ये है कि जब अपने ऊपर बात आई तो प्रभाकरन ने ये नियम तोड़ा और मतिवत्थनी इराम्बू से विवाह किया.

कहा जाता है कि उन्होंने प्रभाकरन का पहली बार ध्यान उस समय खींचा था जब होली के त्योहार के दौरान उन्होंने रंगों से भरी एक बाल्टी प्रभाकरन के ऊपर उड़ेल दी थी.

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